मसूरी में घर व होटल बनाने हुए आसान, बस पालिका से एक सेटिंग का है खेल, जल्दी करें सीमित समय! जिला प्रशासन को भी लेना चाहिए सज्ञान
प्रदीप भण्डारी
मसूरी ।
आप मसूरी में व्यवसायिक भवन बनाना चाह रहे हैं, मगर नक्शा पास नहीं हो रहा? चिंता नाको भाई नक्शा पास हो जाएगा । आपने मसूरी में जमीन ली है मगर वह नोटिफाइड एरिया में है, वन विभाग से एनओसी नहीं मिल रही ? चिंता नाको भाई मिल जाएगी । आप मसूरी में होटल खोलना चाहते हैं मगर सुप्रीम कोर्ट की रोक के कारण होटल का नक्शा स्वीकृत नहीं हो सकता? चिंता नाको भाई नक्शा भी पास होगा और होटल भी खुल जाएगा ।
भाई लोगों बात मसूरी में उपरोक्त सभी कार्य कराने की है तो बहुत आसान ट्रिक बता रहा हूॅ, बोले तो फार्मूला दे रहा हूॅ । फार्मूला यह कि मसूरी नगर पालिका में आपकी सेटिंग होनी चाहिए । फिर आप अपने घने जंगल वाली नोटिफाइड भूमि पर स्थानीय पत्थरों की मिट्टी युक्त करीब एक दो फुट की चार दीवारी चिनवा लीजिए । फिर दीवार में कुछ हल्की फुल्की तोड़ फोड़ कर कुछ समय के लिए उसे वैसा ही छोड़ दीजिए । उस पर मिट्टी घास जमनें दीजिए। कुछ माह के बाद पालिका और वन विभाग से सेटिंग के हथियार से उस स्थल का सर्वेक्षण करा दीजिए । स्वयंभू महाभूवैज्ञानिक संयुक्त कमेठी की रिपोर्ट आएगी ‘प्रश्नगत स्थल पर पुराना भवन / संरचना वर्ष 1980 से पूर्व निर्मित है । जिसका निरीक्षण के दौरान मौके पर सत्यापन किया गया । मौके पर पुरानी संरचना जमीन दोज है, जिसकी मौके पर नपत नहीं ली जा सकी । अतः प्रस्तावित निर्माण कार्य वर्ष 1980 से पूर्व की निर्मित संरचना के अन्तर्गत किए जाने पर वन संरक्षण अधिनियम 1980 के प्रावधान लागू नहीं होते । (नोट- यहाॅ यह कोई पूछने वाला नहीं है कि जब वह ज्ञानी कमेठी अपने ही रिपोर्ट में एक लाइन पहले यह लिख रही है कि ‘मौके पर पुरानी संरचना जमीन दोज है, जिसकी मौके पर नपत नहीं ली जा सकी ।’ तो प्रस्तावित नक्शे में कथित पुराने जमीन दौज भवन का क्षेत्रफल कैसे दर्शाया जा सकता है । विदित हो कि सुप्रीम कोर्ट के याचिका संख्या 749/1995 सुप्रीम कोर्ट मोनेटरिंग कमेठी बनाम एमडीडीए पर आदेश के बाद मसूरी में कोई भी होटल या कोई भी व्यवसायिक नक्शा पास नहीं हो सकता । मसूरी में कहीं भी निजी वन भूमि या वन भूमि पर निर्माण हेतु केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति लेनी होगी । कोर्ट के दिशा निर्देशों के तहत केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने आदेश जारी किया हुआ है कि यदि सम्बन्धित स्थल पर पुरानी कोई बिल्डिंग है तो उसका उसी क्षेत्रफल में पुर्ननिर्माण हो सकता है, जिसका निरीक्षण कमेठी करेगी । बस इसी एक आदेश की आड़ में मसूरी में अनेकों स्थान पर भवन निर्माण का काला धंधा खूब फलफूल रहा है । जिला खान एवं भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की कारगुजारियों के कारण भी ऐसे लोगों के लिए यह काम बहुत आसान हो गया है। मगर मसूरी का आम आदमी नहीं बल्कि शातिर, रसूखदार और धनबल वाले लोग इसका भरपूर मजा और मोटी कमाई कर रहे हैं ।
बहरहाल पालिका के सरपस्ती में गठित भू व पौराणिक वेता महाज्ञानी कमेठी की रिपोर्ट पर बस हो गया जी आपका काम । फिर पुरानी बिल्डिंग की पुष्टी के लिए आपको न खान भू गर्भीय वैज्ञानिकों की रिपोर्ट की आवश्यकता न आई आई टी रूड़की की । अब तो एमडीडीए से भी आपका नक्शा पास हो जाएगा फिर आप मौके पर बड़े बड़े पेड़ और वन क्षेत्र में बड़ी जेबीसी मशाीन लगाकर मस्ती से बनाएं मनमाना बहुमंजिला और बहुभवनीय भवन/ होटल। कोई पूछे तो मार दें उसके चेहरे पर नक्शा। और आपने क्या कहना उससे पहले तो एमडीडीए और वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी पहले ही भौंपू बजा देते हैं कि नक्शा पास है । नक्शा पास होने का मतलब सात खून माफ होने के बाराबर हो जाता है फिर । फिर वह वाइल्ड लाइफ सेंचुरी हो या प्रतिबंधित चूना खान क्षेत्र ।

बहु कमरे एवं बहु मंजिला भवन बनते ही फिर आपको चट करके मिल जाएगा पर्यटन विभाग से होम स्टे या गेस्ट हाउस का लाइसेंस, साथ ही लाखों रूपए सब्सिडी भी मिल सकती है । और फिर आप अपने शानदार होटल की टैरेस पर पैर पसारकर लम्बी बादशाही कुर्सी पर बैठकर हर रोज एक कमरे सेे कमाइए 8 हजार से 25 हजार तक । पैकज में 90 हजार से 2 लाख प्रतिदिन तक । और हां पर्यावरण नुकशान और पार्किंग की भी कोई चिंता नाको भाई। मसूरी नगर के अंदर और बाहर की सारी सड़कें अपनीं ही तो हैं । सड़क पर ही कस्टमर की गाड़ी पार्क करवानी है, खबरदार अपने होटल के अंदर पार्किंग बनवायी तो, उतनी जगह पर कमरे बनवाना, 80 हजार रूपया प्रतिदिन कमाना है या नहीं। एक्स्ट्रा कमायी भी तो खूब होनी चाहिए। सड़क पर गाड़ी पार्क करते हुए पुलिस रोके तो पुलिस पर बदतमीजी और उत्पीडन की शिकायत कर दीजिए, कुछ का तो स्थानातरण और कुछ को बर्खास्त करवा दीजिए । आखिरकार उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक के कई नेता मंत्री आपका फोन नहीं उठाएंगे तो क्या किसी गरीब का फोन उठाएंगे? मसूरी तो गर्त में जा रही जाने दो । जब वहां के मूल नागरिकों (जो 100 साल से मसूरी में रहते हैं) को कोई परवाह नहीं है मसूरी की तो तुम्हें क्या पड़ी है । मगर जल्दी करलो मसूरी में कानून का मूॅह चिढ़ाकर अवैध निर्माण और कमाई । क्योंकि पहाड़ों की रानी की सांसे उखड़ रही हैं बहुत कम समय बचा है मसूरी के पास ।
(सम्मानित पाठकों उक्त लेख एक व्यंग्य ही नहीं सच्चाई भी है। जो पिछले 8 – 10 सालों से मसूरी में बड़ी मात्रा में चल रहा है । यदि इमानदारी से जांच हो जाय तो इन कथित पुरानी संरचना के आधार पर नए बने भवनों/ होटलों का जो सच सामने आएगा उससे न सिर्फ आपकी आॅखें फटी रह जाएंगी बल्कि एक बड़ा गिरोह कानून की गिरफ्त में भी आएगा )। उपरोक्त खेल के बारे में पालिका के वर्तमान अधिशासी अधिकारी और डी एफ ओ को भी इस सवांदताता द्वारा बताया गया है। अब देखते हैं क्या होता है। मगर उपरोक्त प्रकरण बहुत गंभीर है. नगर पालिका अध्यक्ष, उच्च वन अधिकारियों समेत जिला प्रशासन को भी लेना चाहिए सज्ञान।
