लिव इन रिलेशनशिप के खिलाफ हैं अनेक धर्म गुरु, फ़िल्म लिव इन यूके की सराहना हर जगह
देहरादून । लिव इन यूके फिल्म अपने निर्माण के उद्देश्य में सफल रही है। फिल्म को देखने के बाद आज अनेक युवक युवती जागरूक हुई हैं और लिव इन में पंजीकरण फीका पड़ा है । लिव इन कानून लागू होने के समय जोे पंजीकरण का शोर आपको सुनाई देता था वह अब नहीं सुनाई देता है। अर्थात सनातनी लोगों द्वारा लिव इन को नकारा गया है । अब आपको उत्तराखण्ड में लिव इन पंजीकरण के मामले ना के बराबर सुनाई देते होंगे। क्यूंकि फिल्म देखने के बाद युवा पीढ़ी और समाज को यह महसूस हुआ कि आज की उन्मादी दशा पर काबू नहीं पाया गया तो 25 साल बाद का क्या वातावरण होगा । स्वयं लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले पुरूष और महिलाओं का अपने बच्चों, परिवार एवं समाज में क्या स्थान होगा, घरों क हालात क्या होंगे । यह पक्का है कि लिव इन में रहने की सोच रहे लोगों ने फिल्म जरूर देखी है । फिल्म देखनें के बाद लिव इन के बारे में सोच रहे युवाओं की धारणा जरूर बदली है और बदलनी भी चाहिए ।
फिल्म के कमेंट्स बाॅक्स समेत फिल्म निर्देशक प्रदीप भण्डारी को समाज के बड़े वर्ग ने लिव इन जैसे संवेदनशील विषय पर फिल्म बनाने पर भारी प्रशंसा की है । यूट्यूब पर फिल्म के प्रति लोगों के सराहना के कमेंट्स ने फिल्म की सफलता साबित की है । फिल्म के निर्माता निर्देशक प्रदीप भण्डारी का कहना है कि एक रचनाकार को तब बहुत खुशी होती है जब उनके प्रयास की सराहना होती है । उन्होंने कहा कि यह उनकी और उनकी पूरी टीम की मेहनत सफल हुई है । वह ऐसे ही उद्देश्यपूर्ण विषयों पर फिल्म बनाते रहेगें । उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अभी तक यह फिल्म नहीं देखि है वे जरूर यह फिल्म लिव इन यूके जरूर देंखें, फिल्म लिंक –
दरसअल उत्तराखंड सरकार ने जनवरी 2025 में प्रदेश में जो यु सी सी कानून लागू किया है उसका हिन्दुओं में ज्यादा विरोध देखने को नहीं मिला। मगर इस कानून में जो लिव इन (सहवासी ) की जो धारा जोड़ी गई है उसे हिन्दू वर्ग सनातन और समाज के खिलाफ बताकर पूर्ण विरोध में हैं। बड़े बड़े धर्म गुरुओं ने भी लिव इन को अस्वीकार्य बताया है। यह मामला अभी कोर्ट में भी है।
